MARK I (Harvard Mark I) क्या है? इतिहास, विशेषताएँ और कार्यप्रणाली - MARK I (Harvard Mark I) in Hindi

MARK I (Harvard Mark I) 

MARK - I  (मार्क-I) जिसे Harvard Mark I या  IBM IBM Automatic Sequence Controlled Calculator (ASCC) भी कहा जाता है, जिसे दुनिया के पहले बड़े Electro - Mechanical Computers में से एक था। इसे जटिल गणितीय गणनाओं कों स्‍वचालित रुप से करने के लिए विकसित किया गया है। 

1944 में विकसित MARK I (Harvard Mark I) दुनिया के शुरुआती प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंप्यूटरों में से एक था।


इस कंप्‍यूटर का निर्माण IBM (International Business Machines) और हार्वर्ड विश्‍वविद्यालय (Harvard University) के सहयोग से किया गया है इसका प्रमुख डिजाइन हावर्ड एच. आइकेन (Howard H. Aiken) ने तैयार किया था। इस ब्‍लाॅग में हम आप को मार्क-। के बारे में जानकारी देगे।     

मार्क-। क्‍या है?

मार्क-। एक विद्युत-यांत्रिक (Electro-Mechanical) कंप्‍यूटर था, जो विद्युत रिले (Electrical Relays), गियर (Gears), स्विच तथा घूमने वाले शाफ्ट की सहायता से गणनाएँ करता था। यह बिना मानव हस्‍तक्षेप के लंबे समय तक स्‍वचालित रूप से जटिल गणितीय गणनाएँ करने में सक्षम है। यह कंप्‍यूटर मुख्‍य रूप से वैज्ञानिक अनुसंधान, अंजीनियरिंग तथा सैन्‍य गणनाओं के लिए उपयोग किया जाता था।


1944 में विकसित MARK I (Harvard Mark I) दुनिया के शुरुआती प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंप्यूटरों में से एक था।

मार्क-। का इतिहास 

हार्वर्ड आइकेन द्वारा IBM के साथ मिलकर सन् 1944 में पहला इलेक्‍ट्रो मैकेनिकल कंप्‍यूटर तैयार किया गया। इसका नाम '' ऑटोमेटिक सिकेन्‍स कैल्‍कुलेटर रखा गया। इस मशीन को मार्क-। के नाम से भी जाना जाता हैं। 1937 ई. में Howard H. Aiken ने एक ऐसी मशीन की कल्‍पना की जो बड़े और जटिल गणितीय कार्यों को स्‍वचालित रुप से कर सके IBM ने इस योजना को समर्थन दिया गया और पाँँच वर्षों के विकास के बाद 1944 में Harvard Mark-। तैयार किया गया था।  


द्वितीय विश्‍व युद्ध (World War ।।) के दौरान इसका उपयोग अमेरिकी नौसेना द्वारा बैलिस्टिक तालिकाएँँ, रडार गणनाएँ और अन्‍य वैज्ञानिक एवं सैन्‍य कार्यों के लिए किया गया था।   

मार्क-। के प्रमुख तथ्‍य

विषयविवरण
पूरा नामHarvard Mark I (IBM ASCC)
विकास वर्ष1944
मुख्य डिजाइनरHoward H. Aiken
निर्माताIBM एवं Harvard University
प्रकारElectro-Mechanical Computer
इनपुटPunch Paper Tape
आउटपुटPrinter और Punch Cards
प्रयोगवैज्ञानिक एवं सैन्य गणनाएँ

मार्क-। की मुख्‍य विशेषताऍं 

विशेषताविवरण
प्रोग्रामेबलनिर्देशों के अनुसार स्वचालित रूप से कार्य करता था।
इलेक्ट्रो-मैकेनिकल तकनीकविद्युत और यांत्रिक भागों का संयुक्त उपयोग।
उच्च सटीकताउस समय की तुलना में विश्वसनीय परिणाम देता था।
स्वचालित गणनालगातार लंबे समय तक बिना रुके गणना कर सकता था।
पंच कार्ड एवं पेपर टेपडेटा और निर्देश पढ़ने के लिए उपयोग किए जाते थे।
बड़ी क्षमताजटिल वैज्ञानिक एवं गणितीय समस्याओं का समाधान कर सकता था।

मार्क-। तकनीक की विशेषताएँ

तकनीकी विवरणजानकारी
लंबाईलगभग 51 फीट
ऊँचाईलगभग 8 फीट
वजनलगभग 5 टन (लगभग 9,500–10,000 पाउंड)
घटकों की संख्यालगभग 7.65 लाख (765,000+)
वायरिंगलगभग 500–530 मील तार
मेमोरी72 संख्याएँ (23 अंकों तक) संग्रहित कर सकता था
बिजली से संचालितहाँ

मार्क-। कैसे कार्य करता है। 

  •  प्रोग्राम और डेटा पंच पेपर टेप में दर्ज किए जाते थे।
  •  मशीन इन निर्देशों को क्रमवार पढ़ती थी।
  • विद्युत और यांत्रिक रिले की सहायता से गणनाएँ करती थी।
  • परिणाम प्रिंटर या पंच कार्ड के माध्‍यम से प्रदर्शित किए जाते थे। 

मार्क-। के उपयोग 

  • वैज्ञानिक अनुसंधान
  • गणनाएँ 
  • बैलिस्टिक गणनाऍं
  • इंजीनियरिंग डिजाइन
  • गणितीय अनुसंधान
  • खगोलीय गणनाएँ

मार्क-। के लाभ

  • स्‍वचालित रूप से कार्य करता था।
  • बड़ी और जटिल गणनाएँँ कर सकता था।
  • मानवीय त्रुटियों में कमी आई।
  • वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया गया।
  • आधुनिक कंप्‍यूटरों के विकास का आधार बना।

मार्क-। की सीमाऍं 

  • गति आज के कंप्‍यूटरों की तुलना में बहुत धीमी थी।
  • आकार बहुत बड़ा था।
  • बिजली की अधिक खपत होती थी।
  • केवल सीमित प्रकार के प्रोग्राम चला सकता था।
  • रखरखाव कठिन और महँँगा था। 
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MARK-1 का कंप्‍यूटर के विकास में योगदान 

MARK-| ने आधुनिक कंप्‍यूटर विज्ञान के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने यह सिद्ध किया कि मशीनें स्‍वचालित से निर्देशों का पालन करके जटिल गणनाएँ कर सकती है। MARK-। कंप्‍यूटर के इतिहास का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। इसे 1944 ई. में हॉवर्ड एच. ऐकेन (Howard H. Aiken) ने IBM के सहयोग से विकसित किया था। यह दुनिया के शुरुआती स्‍वचालित विद्युत-यांत्रिक कंप्‍यूटरों में से एक था। मार्क-। ने आधुनिक कंप्‍यूटरों के विकास की दिशा में कई महत्‍वपूर्ण योगदान दिए है।

1.  Automatic Calculation

MARK-। बिना बार-बार मानव हस्‍तक्षेप के लंबे और जटिल गणितीय कार्यों को स्‍वचालित रुप से कर सकता था। 

2. Large-Scale Computation

यह मशीन हजारों गणितीय गणनाएँ लगातार कर सकती थी, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और इंजीनियरिंग कार्य अधिक सरल और तेज हो गए है। 

3. वैज्ञानिक और अनुसंधान में उपयोग 

मार्क-। द्वि‍तीय विश्‍व युद्ध के दौरान मार्क-। का उपयोग बैलिस्टिक गणनाओं नौसेना के कार्यों वैज्ञानिक अनुसंधानों में किया गया। 

4. आधुनिक कंप्‍यूटरों की नींव 

मार्क-। ने यह सिद्ध किया कि मशीने स्‍वचालित रुप से निर्देशों के अनुसार कार्य कर सकती हैं। इसके सिद्धांतों ने बाद में विकसित इलेक्‍ट्रॉनिक कंप्‍यूटरों जैसे ENIAC और EDVAC, के विकास को प्रेरित किया गया है। 

5. Program Control

MARK-। में निर्देशों के अनुसार क्रमबद्ध तरीके से कार्य करने की क्षमता थी। इससे प्रोग्रामिंग और Automation की अवधारणा को मजबूती मिली है। 

निष्‍कर्ष 

MARK । (Harvard Mark ।) कंप्‍यूटर इतिहास का एक महत्‍वपूर्ण मील का पत्‍थर था। यह अमेरिका के पहले बड़े प्रोग्रामेबल इलेक्‍ट्रो-मेकेनिकल कंप्‍यूटरों में से एक था, जिसने वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और अन्‍य क्षेत्रों में गणना को संभव बनाया गया इसकी तकनीक और कार्यप्रणाली ने आधुनिक कंप्‍यूटरों के विकास को मजबती प्रदान की है। 

FAQ

1.  MARK । का पूरा नाम क्‍या है?

Harvard Mark । या IBM Automatic Sequence Controlled Calculator (ASCC)

2. MARK । का निर्माण कब हुआ था?

इसका निर्माण 1944 में हुआ था।

3. MARK । में मुख्‍य डिजाइनर कौन थे?

Howard H. Aiken इसके मुख्‍य डिजाइनर थे।

4. MARK । किस प्रकार का कंप्‍यूटर था?

यह एक Electro-Mechanical विद्युत-यांत्रिक Computer था।

5. MARK । में इलनुट कैसे दिया जाता था?

Punch Cards और Punched Paper Tape के माध्‍यम से। 

6. MARK । का उपयोग किन क्षेत्रों में किया जाता था?

वैज्ञानिक अनुसंधान, इंजीनियरिंग, रक्षा, नौसेना तथा जटिल गणितीय गणनाओं में 



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