कंप्‍यूटर का इतिहास और विकास - Development of Computer In Hindi

कंप्‍यूटर का विकास  Development Of Computer In Hindi

कंप्‍यूटर का विकास (Development of Computer) - यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह प्रारंभ में गणना (Calculation) करने के लिए सरल उपकरणों का उपयोग किया जाता था, समय के साथ विज्ञान और तरनीक कारण कंप्‍यूटर अधिक शक्तिशाली मशीन बन गया है। कंप्‍यूटर को अत्‍याधुनिक (Modern) मशीन भी कहा जाता है। आज के कंप्‍यूटर पहले की तुलना में अधिक तेज (Fast, Accurate, Reliable और Efficient है। आज के आधुनिक कंप्‍यूटर कृतिम बुद्धिमत्‍ता (Airtificial Intelligence), क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग (Cloud Computing)और उच्‍च गति वाले प्रोसेसर जैसी तकनीको लैस भी शामिल है। इस ब्‍लॉग में हम आप को कंप्‍यूटर का इतिहास और विकास  के बारे में बताएगे।  

कंप्‍यूटर के विकास का इतिहास लगभग 2500 वर्ष पुराना माना जाता है। इसकी शुरुआत अबेकस (Abacus) के द्वारा हुई है, जो सबसे पहला गणना उपकरण था। इसके बाद विभिन्‍न यांत्रिक(Mechanical), विद्युत-यांत्रिक(Electro-Mechanical) और इलेक्‍ट्रॉनिक उपकरणों का विकास हुआ, जिन्‍होंने आधुनिक कंप्‍यूटर की नींव रखी थी। 

कंप्‍यूटर का विकास (Eeolution of Computer)

कंप्‍यूटर का विकास (Evolution Of Computer):- कंप्‍यूटर एक लंबी और रोचक प्रक्रिया है, जो लगभग 2500 वर्ष पहले अबेकस से शुरु होकर आज के अधुनिक Artificial Intelligence (AI) पर आधारित कंप्‍यूटरों तक पहुँच सकती है पहले गणन हाथ से या साधारण उपकरणों द्वारा की जाती थी। बााद में नई तकनीकों के विकास के साथ कंप्‍यूटर अधिक शक्तिशाली, तेज और बुद्धिमान बनते गए। इसी परिवर्तन को कंप्‍यूटर का विकास कहा जाता है। 

1. अबेकस ( Abacus) 

यह एक प्राचीन गणना यंत्र है जिसका आविष्‍कार प्राचीन बेवीलोन में अंकों की गणना के लिए किया गया था। इसे संसार का प्रथम गणना यंत्र कहा जाता है। इसमें तारों में गोलाकार मनके पिरोयी जाती है जिसकी सहायता से गणना को आसाान बनाया गया है। अबेकस दुनिया का सबसे प्राचीन और पहला गणना उपकरण माना जाता है। इसका उपयोग जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी गणितीय गणनाऍं करने के लिए किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि अबेकस का विकास 2500 वर्ष पहले चीन में हुआ था, हालांकि इसके प्रारंभिक रुप का उपयोग अन्‍य प्राचीन सभ्‍यताओं में भी किया जाता था।  

Development of Computer In Hindi

अबेकस की संरचना (Structure of Abacus)

अबेकस दुनिया का सबसे प्राचीन गणना उपकरण माना जाता है। इसकी संरचना बहुत सरल होती है, लेकिन इसके माध्‍यम से जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी गणनाऍं आसानी से की जा सकती है। 

अबेकस की संरचना 

भाग (Part)विवरण (Description)
फ्रेम (Frame)अबेकस का बाहरी ढांचा, जो लकड़ी, प्लास्टिक या धातु का बना होता है।
छड़ें (Rods/Wires)फ्रेम के अंदर कई सीधी छड़ें या तार लगे होते हैं, जिन पर मोती (Beads) लगे रहते हैं।
मोती (Beads)प्रत्येक छड़ पर कई मोती होते हैं, जिन्हें आगे-पीछे खिसकाकर संख्याओं का मान दर्शाया जाता है।
विभाजन पट्टी (Divider/Beam)कुछ अबेकस (जैसे Soroban या Suanpan) में बीच में एक क्षैतिज पट्टी होती है, जो ऊपर और नीचे के मोतियों को अलग करती है।
स्थान मान (Place Value)प्रत्येक छड़ एक स्थान मान (इकाई, दहाई, सैकड़ा, हजार आदि) को दर्शाती है।

अबेकस के मुख्‍य भाग Main parts of an Abacus

  • फ्रेम (Frame): 
  • छड़ें (Rods):
  • माती (Beads):
  • बीम (Beam):
  • स्‍थान मान (Place Value):
        ┌───────────────────────────┐
│ ○ ○ ○ ○ ○ │ ← ऊपरी मोती
├───────────────────────────┤ ← विभाजन पट्टी (Beam)
│ ● ● ● ● ● ● ● ● ● ● │
│ ● ● ● ● ● ● ● ● ● ● │ ← निचले मोती
└───────────────────────────┘
          │   │   │   │   │
          इकाई दहाई सैकड़ा हजार दस-हजार

अबेकस कैसे कार्य करता है?

अबेकस में प्रत्‍येक तार का एक स्‍थान मान को दर्शाता है, जैसे- 
  • इकाई
  • दहाई
  • सैकड़ा
  • हजार
  • दस-हजार 

अबेकस की विशेषताऍं (Characteristics of Abacus)

  • दुनिया का सबसे पुराना गणना उपकरण।
  • बिजली की आवश्‍यकता नहीं होती।
  • उपयोग में सरल और टिकाऊ।
  • मानसिक गणना की क्षमता बढ़ाने में सहायक। 
  • बच्‍चों को गणित सीखने में उपयोगी। 

अबेकस के उपयोग 

  • जोड़, घटाव, गुणा, भाग करना।
  • विद्यालयों में गणित की शिक्षा।
  • मानसिक गणना का अभ्‍यास करना।
  • गणितीय कौशल विकसित करने में। 

अबेकस की विशेषताऍं 

  • यह बिजली के बिना कार्य करता है।
  • इसकी सहायता से जोड़, घटाव, गुणा और भाग की गणना भी कर सकता है।
  • बच्‍चों को गणित सीखेनें में मदद मिलती है। 
  • यह तेज और सरल गणना का प्राचीन साधन है। 

2. पास्‍कलाइन (Pascaline)

फ्रांस के गणितज्ञ ब्‍लेज पास्‍कल (Blaise Pascal) ने 1642 में प्रथम यांत्रिक गणना मशीन या यांत्रिंक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator) का आविष्‍कार किया। यह केवल जोड़ व घटा सकती थी। अत: इसे एडिंग मशीन भी कहा गया है। पास्‍कालाइन विश्‍व का पहला सफल यांत्रिक गणना यंत्र था। इसका आविष्‍कार ब्‍लेज पास्‍कल ने सन 1642 ई. में किया था। उन्‍होने यह मशीन अपने पिता की कर गणनाओं (Tax Calculations) को सरल बनाने के लिए बनाई थी। पास्‍कलाइन की सहायता से मुख्‍य रुप से जोड़ और घटाव की गणनाऍं की जा सकती थीं। बाद में इसमें कुछ सुधार करके सीमित रूप से गुणा और भाग भी किए जाने लगे। 

पास्‍कलाइन कैसे कार्य करती थी?

पास्‍कलाइन में कई दाँँतेदार पहिए लगे होते थे। प्रत्‍येक पहिया एक अंक का प्रतिनिधित्‍व करता था। जब उपयोगकर्ता किसी पहिए को घुमाता था, तो मशीन यांत्रिक प्रणाली के माध्‍यम से गणना करती थी। यदि किसी पहिए का मान 9 से आगे बढ़ता, तो पहिया स्‍वत: 1 बढ़ जाता, ठीक उसी प्रकार जैसे आज के कैलकुलेटर में Carry होता है। 

पास्‍कलाइन के उपयोग 

  • जोड़
  • घटाव
  • कर 
  • व्‍यापारिक हिसाब-किताब गणितीय गणनाऍं 

पास्‍कलाइन की विशेषताऍं (Characteristics of Pascaline)

  • विश्‍व का पहला सफल यांत्रिक कैलकुलेटर
  • 1642 ई. में विकसित किया गया।
  • ब्‍लेज़ पास्‍कल द्वारा आविष्‍कृत।
  • गियर और दाँँतेदार पहियों 
  • जोड़ और घटाव की गणना तेजी से कर सकता था।
  • बिजली की आवश्‍यकता नहीं होती थी। 
  • हाथ से घुमाकर चलाया जाता था। 

पास्‍कलाइन के लाभ

  • हाथ से गणना करने की तुलना में अधिक तेज।
  • गणना में त्रुटियाँँ कम होती थी।
  • यांत्रिक तकनीक का उत्‍कृष्‍ट उदाहरण।
  • व्‍यापार और लेखांकन में उपयोगी। 

पास्‍कलाइन की सीमाएँ 

  • मुख्‍य रुप से कवल जोड़ और घटाव कर सकती थी।
  • गुणा और भाग नहीं कर सकती थी।
  • आकार अपेक्षाकृत बड़ा और महँगा था।
  • केवल सीमित अंकों तक गणना कर सकती थी। 
  • सामान्‍य लोगों के लिए आसानी से उपलब्‍ध नहीं थी।

पास्‍कलाइन का महत्‍व

पास्‍कलाइन ने यांत्रिक गणना के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की थी। यह आधुनिक कैलकुलेटर और कंप्‍यूटर के विकास की शुरुआती महत्‍वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। इसके बाद विकसित मशीनों, जैसे Stepped Reckoner, Difference Engine Analytical Engine, ने कंप्‍यूटर को आगे बढ़ाया है। 

पास्कलाइन का परिचय

विषयविवरण
नामपास्कलाइन (Pascaline)
आविष्कारकब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal)
आविष्कार वर्ष1642 ई.
प्रकारयांत्रिक गणना यंत्र (Mechanical Calculator)
मुख्य कार्यजोड़ और घटाव करना
उपयोगव्यापार, कर गणना और लेखांकन

पास्‍कलाइन की संरचना (Structure of Pascaline)

पास्‍कलाइन कई दाँँतेदार पहियों और घूमने वाले डायल से बनी होती है।
  • दाँँतेदार पहिए
  • घूमने वाले डायल 
  • संख्‍या विंडो
  • धातु का बॉक्‍स  

पास्‍कलाइन की कार्य प्रणाली 

  • उपयोगकर्ता डायल को घुमाकर संख्‍या दर्ज करता था। 
  • अंदर लगे गियर आपस में घूमते थे।
  • गियर की गति के आधार पर जोड़ या घटाव की गणना होती थी।
  • परिणाम मशीन के ऊपरी भाग में दिखाई देता था।

कार्य प्रणाली का फ्लो चार्ट

संख्या दर्ज करें
          │
         ▼
डायल (Wheel) घुमाएँ
          │
         ▼
गियर (Gears) कार्य करें
          │
         ▼
गणना (Calculation)
          │
         ▼
परिणाम (Result Display)

3. नेपियर बोन्‍स (Napier's Bones)

नेपियर बोन्‍स (Napier's Bones) एक प्रारंभिक गणना उपकरण है, जिसका जिसका आविष्‍कार 1617 ई. में स्‍कॉटलैड के प्रसिद्ध गणितज्ञ जॉन पेपियर ने किया था। इस उपकरण का उपयोग मुख्‍य रूप से गुणा, भाग, वर्ग और वर्गमूल जैसी गणनाओं को सरल और तेज बनाने के लिए किया जाता था। ''लेनिसी बोन्‍स एक गणना उपकरण है, जिसका आविष्‍कार 1617 ई. में जॉन नेपियर ने किया था। इसमें अंकित छड़ों की सहायता से गुणा, भाग तथा अन्‍य गणितीय गणनाऍं की जाती थी''।

नेपियर बोन्‍स का परिचय (Introduction to Napier's Bones)

विषयजानकारी
आविष्कार का नामनेपियर बोन्स (Napier's Bones)
आविष्कारकजॉन नेपियर (John Napier)
आविष्कार वर्ष1617 ई.
देशस्कॉटलैंड (Scotland)
प्रकारप्रारंभिक गणना उपकरण (Calculating Device)
मुख्य कार्यगुणा, भाग, वर्ग और वर्गमूल की गणना

4. स्‍टेप्‍ड रेकनर

स्‍टेप्‍ड रेकनर एक यांत्रिक गणन मशीन (Mechanical Calculating Machine) थी, जिसका आविष्‍कार 1673 ई. में जर्मनी के प्रसिद्ध गणितज्ञ और दार्शनिक गॉटफ्रीड विल्‍हेम लाइबनिज (Gottfried Wilhelm Leibniz) ने किया था। स्‍टेप्‍ड रेकनर एक ऐसी यांत्रिक मशीन थी जिसमें विशेष प्रकार के स्‍टेप्‍ड ड्रम (Stepped Drum या Leibniz Wheel का उपयोग किया गया था। इसकी सहायता से बड़ी संख्‍याओं की गणना पहले की मशीनों की अपेक्षा अधिक तेज तरीके से की जा सकती थी। 

कंप्‍यूटर के विकास में योगदान Contribution to the development of the computer

स्‍टेप्‍ड रेकनर ने गणना तकनीक को एक नया आयाम दिया। Leibniz Wheel का सिद्धांत बाद में कई यांत्रिक कैलकुलेटरो में उपयोग किया गया इस मशीन ने आधुनिक कंप्‍यूटर और कैलकुलेटर के विकास की दिशा में योगदान दिया है। 

Facts important from an examination perspective

विषयजानकारी
आविष्कार का नामस्टेप्ड रेकनर (Stepped Reckoner)
आविष्कारकगॉटफ्रीड विल्हेम लाइबनिज़ (Gottfried Wilhelm Leibniz)
आविष्कार वर्ष1673 ई.
देशजर्मनी (Germany)
प्रकारयांत्रिक गणना मशीन (Mechanical Calculator)
मुख्य कार्यजोड़, घटाव, गुणा और भाग
विशेष तकनीकLeibniz Wheel (Stepped Drum)

पास्कलाइन और स्टेप्ड रेकनर में अंतर Difference between the Pascaline and the Stepped Reckoner

पास्कलाइन (Pascaline)स्टेप्ड रेकनर (Stepped Reckoner)
आविष्कार: 1642 ई.आविष्कार: 1673 ई.
आविष्कारक: ब्लेज़ पास्कलआविष्कारक: गॉटफ्रीड विल्हेम लाइबनिज़
मुख्यतः जोड़ और घटावजोड़, घटाव, गुणा और भाग
अपेक्षाकृत सरल मशीनअधिक उन्नत और शक्तिशाली मशीन

5. ENIAC ( Electronic Numerical Integrator and Computer)

ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) :- यह दुनिया के पहले सामान्‍य प्रयोजन (General Purpose) इलेक्‍ट्रॉनिक डिजिटल कंप्‍यूटरों में से एक था। इसका निर्माण द्व‍ितीय विश्‍व युद्ध (World War2) के दौरान सैन्‍य गणनाओं को तेजी से करने के लिए किया गया था। इसका विकास जॉन डब्‍ल्‍यू  माउचली (John W. Mauchly) और जे. प्रेस्‍पर एकर्ट (J. Presper Eckert) University of Pennsylvania, USA में किया इसका निर्माण 1945 में सार्वजनिक रुप से प्रस्‍तुत किया गया । ENIAC एक विशाल इलेक्‍ट्रॉनिक कंप्‍यूटर था, जो वैक्‍यूम टयूब की सहायता से बहुत तेज गणनाऍं करता था। 

Full From of  ENIAC 

  • E- Electronic
  • N- Numerical
  • I-Integrator
  • A- And
  • C-Computer

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

विषयजानकारी
नामENIAC
पूरा नामElectronic Numerical Integrator and Computer
निर्माण पूर्ण1945
सार्वजनिक परिचय1946
आविष्कारकJohn W. Mauchly एवं J. Presper Eckert
स्थानUniversity of Pennsylvania, USA
तकनीकVacuum Tubes
वैक्यूम ट्यूबलगभग 18,000
वजनलगभग 30 टन
बिजली की खपतलगभग 150 kW
उपयोगवैज्ञानिक एवं सैन्य गणनाएँ

कंप्‍यूटर के महत्‍वपूर्ण आविष्‍कारक

उपकरणआविष्कारकवर्षमुख्य कार्य
अबेकस (Abacus)प्राचीन सभ्यतालगभग 2500 वर्ष पूर्वजोड़, घटाव
नेपियर बोन्सजॉन नेपियर1617गुणा, भाग
पास्कलाइनब्लेज़ पास्कल1642जोड़, घटाव
स्टेप्ड रेकनरगॉटफ्रीड विल्हेम लाइबनिज़1673जोड़, घटाव, गुणा, भाग
ENIACJohn W. Mauchly एवं J. Presper Eckert1945–46प्रथम General Purpose Electronic Digital Computer

निष्‍कर्ष (Conclusion)

कंप्‍यूटर का विकास मानव इतिहास की सबसे महत्‍वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है। इसकी शुरुआत अबेकस जैसे सरल गणना उपकरण से हुई और समय के साथ पास्‍कलाइन, नेपियर बोन्‍स, स्‍टेप्‍ड रेकनर तथा ENIAC जैसे उपकरणों के विकास ने आधुनिक कंप्‍यूटर की नींव रखी। आज के आधुनिक कंप्‍यूटर Artificial Intelligence (AI), Machine Learning (ML), Cloud Computing, Internet of Things (IoT) तथा Quantum Computing जैसी अत्‍योधुनिक तकनीकों से लैंस है। वर्तमान में कंप्‍यूटर केवल गणना करने वाली मशीन नहीं, बल्कि शिक्षा, चिकित्‍सा, बैंकिग, व्‍यापार, अनुसंधान, रक्षा, अंतरिक्ष, कृषि और संचार सहित लगभग हर क्षेत्र का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा बन चुका है। 

FAQ

1 कंप्‍यूटर का विकास क्‍या है।

कंप्‍यूटर का विकास वह प्र‍क्रिया है जिसमें प्राचीन गणना उपकरणों से लेकर आधुनिक पर आधिरित कंप्‍यूटरों तक तकनीकी सुधार हुए है। 

2. कंप्‍यूटर का पहला गणना उपकरण कौन-सा था?

अबेकस को दुनिया का पहला गणना उपकरण माना जाता है।

3. पास्‍कलाइन का आविष्‍कार किसने किया ?

ब्‍लेज पास्‍कल ने 1642 ई. में पास्‍कलाइन का आविष्‍कार किया। 

4.  ENIAC का पूरा नाम क्‍या है?

Electronic Numerical Integrator and Computer

5.  आधुनिक कंप्‍यूटर किन तकनीकों पर आधारित हैं?

आधुनिक कंप्‍यूटर Artificial Intelligence (AI), Cloud Computing, Machine Learning, Internet of Things (IoT) Quantum Computing जैसी तकनीकों पर आधारित हैं। 





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