डायबिटीज (मधुमेह) क्या है?
डायबिटीज, जिसे आमतौर पर मधुमेह कहा जाता है, एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जिसमें आपके शरीर का ब्लड शुगर (रक्त में ग्लूकोज) स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। ग्लूकोज आपके शरीर का मुख्य ऊर्जा स्रोत है, और इसे नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन नामक हार्मोन जरूरी होता है। जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता, तब डायबिटीज होती है।
डायबिटीज एक मेटाबोलिक कंडीशन है जिसमें शरीर इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल या प्रोडक्शन नहीं कर पाता, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।
डायबिटीज के प्रकार
1. टाइप 1 डायबिटीज• यह ज्यादातर बच्चों और युवा लोगों में होती है।
• शरीर इंसुलिन का उत्पादन कम या बिल्कुल नहीं करता।
• इसका कारण आमतौर पर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का गलती से इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला करना होता है।
2. टाइप 2 डायबिटीज
- • यह सबसे आम प्रकार है।
• शरीर इंसुलिन का उत्पादन करता है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं कर पाता (इंसुलिन प्रतिरोध)।
• अधिकतर यह मोटापा, अनियमित खान-पान और जीवनशैली के कारण होती है।
3. गर्भावधि मधुमेह (Gestational Diabetes)
- • यह गर्भावस्था के दौरान होती है और आमतौर पर जन्म के बाद गायब हो जाती है।
- फास्टिंग: 70–99 mg/dL
- खाने के बाद (2 घंटे): 140 mg/dL से कम
• अगर इसका समय पर इलाज न हो, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।
नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल होना चाहिए:
ब्लड शुगर नियंत्रण (Blood Sugar Control)
- डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसे कुछ आसान तरीकों से कंट्रोल किया जा सकता है. बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, स्ट्रेस मैनेजमेंट और समय पर दवा लेने से शुगर लेवल को Control में रखा जा सकता है.
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स्वस्थ आहार
• फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और कम वसा वाले दूध का सेवन करें।
• ज्यादा मीठे और तले-भुने खाने से बचें। -
नियमित व्यायाम
• रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की या मध्यम गतिविधि जैसे चलना, साइकिल चलाना, योग आदि। -
वजन नियंत्रित रखें
• अतिरिक्त वजन कम करना डायबिटीज के जोखिम को काफी घटा सकता है। -
नियमित जांच
• ब्लड शुगर स्तर की नियमित जांच से समय पर डायबिटीज पकड़ी जा सकती है। -
दवा और इंसुलिन का सही उपयोग
• डॉक्टर की सलाह अनुसार दवा या इंसुलिन लें।
डायबिटीज को नियंत्रित कैसे करें
डायबिटीज, या मधुमेह, एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपके शरीर का रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) स्तर लंबे समय तक सामान्य से अधिक रहता है। अगर इसे नियंत्रित न किया जाए तो यह हार्ट अटैक, किडनी की समस्या, नेत्र संबंधी समस्या और नसों की चोट जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है।
1. संतुलित आहार (Balanced Diet)
• कार्बोहाइड्रेट पर नियंत्रण: सफेद चावल, ब्रेड और मिठाइयों को कम करें।• फाइबर युक्त भोजन: साबुत अनाज, फल, सब्जियाँ और दालें शामिल करें।
• प्रोटीन का महत्व: अंडे, दही, मछली, और पनीर खाएं।
• नमक और तैलीय भोजन कम करें।
2. नियमित व्यायाम (Regular Exercise)
• कार्डियो वर्कआउट: तेज़ चलना, साइकलिंग या तैराकी।• मांसपेशियों के लिए व्यायाम: हल्के वेट या योगा।
• समय: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट सक्रिय रहें।
3. ब्लड शुगर की निगरानी (Blood Sugar Monitoring)
• अपने ब्लड शुगर स्तर को नियमित रूप से मापें।• डॉक्टर द्वारा बताई गई सीमा के अनुसार इलाज और जीवनशैली में बदलाव करें।
4. दवा और इंसुलिन का पालन (Medication Compliance)
• डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयाँ नियमित रूप से लें।• कभी भी दवा का खुराक खुद से न बदलें।
5. तनाव नियंत्रण (Stress Management)
• ध्यान, योगा और गहरी साँस लेने की तकनीकें अपनाएं।• पर्याप्त नींद लें (7-8 घंटे)।
6. धूम्रपान और शराब से बचें
• धूम्रपान और शराब ब्लड शुगर को अस्थिर कर सकते हैं और दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाते हैं।7. नियमित स्वास्थ्य जांच
• HbA1c, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और नेत्र संबंधी जाँच समय-समय पर करवाएँ।8. छोटे बदलाव, बड़ा असर
• भोजन में धीरे-धीरे बदलाव करें।• नियमित चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना, और मीठे का विकल्प फलों से बदलना।
डायबिटीज के कारण
• अनुवांशिक कारक – परिवार में डायबिटीज होने पर जोखिम अधिक होता है।• अस्वस्थ आहार – ज्यादा चीनी, तला हुआ या फैटी खाना।
• शारीरिक निष्क्रियता – व्यायाम की कमी।
• मोटापा – विशेषकर पेट के आसपास अधिक वसा जमा होना।
• उम्र – उम्र बढ़ने के साथ टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ता है।
डायबिटीज के लक्षण
• बार-बार पेशाब आना• अत्यधिक प्यास लगना
• थकान और कमजोरी
• वजन में अनियंत्रित बदलाव
• धुंधली दृष्टि
• घाव का धीरे-धीरे भरना
यदि इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हृदय रोग, किडनी की समस्या, नसों का नुकसान आदि।
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